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प्रकृति के रंग हजार

इसके हर रूप में छलके प्यार

कही लेहलहाते खेत खलिहान

कही पर झरने अपार

वृक्ष हमे है फल देते

बादल बरसाए फुहार

प्रकृति के रंग हजार

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By Shipra